सीमा, हद, गौरव, प्रतिष्ठा
वाक्य प्रयोग- हमें हमेशा अपनी मर्यादा में रहना चाहिये।
जो पुरुषों में सबसे
उत्तम हो अर्थात सबसे अच्छा पुरुष जिसमें अच्छे पुरुष के सारे गुण विद्यमान हों।
राम शब्द संस्क्रत भाषा के दो अच्छरों से मिलकर बना
है “ रा + म ” जिसमें “रा” शब्द का अर्थ है “जो प्रकाश मान है” तथा “म” शब्द का अर्थ है “मै”। अर्थात हमारे अंदर का जो प्रकाश है वह है राम जो कण कण में व्याप्त
है
सीमा, हद, गौरव, प्रतिष्ठा वाक्य प्रयोग- हमें हमेशा अपनी मर्यादा में रहना चाहिये।